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Saturday, 10 September 2011

मां तुझे नमन


प्रथम अंजलि पुष्पों वाली
शैल सुता मां तुझको अर्पण
ब्रह्मचारिणी,मुक्तिदायिनी
करें प्राण मन तुझे समर्पण

भक्त वत्सला भक्तिदायिनी
चन्द्रघंटा मां शक्तिदायिनी
कुषमाण्डा मातेश्वरी तुझको
करते श्री चरणों में वन्दन

अग्नि रूप मां स्कन्द माता
स्वर्णमयी कात्यायिनी माता
अक्षत चंदन रोली कुमकुम
धूप चढा करते अभिनन्दन

कालरात्रि मां भयमुक्त कर दे
अन्तर का तम अविलम्ब हर ले
महागौरी मां लक्षमी रूपा
श्री दायिनी शांति स्वरूपा

कोमल कन्या रूप सयानी
सिद्धीदात्री सुकुमारी भवानी
क्षमाशील तू अति विनीता
महिषासुर हंता दुखहर्ता

ब्रह्मा विष्णु महेश तुझे ध्याते
कर त्रिशूल और कमल सुहाते
दुर्गे दुर्गतिनाशिनी माता
तुझे नमन शत बार नमन

जयति जय जगदम्बे भवानी
फ़िर आना माता वरदायिनी
देना सब भक्तों को दर्शन
शत बार नमन शत बार नमन्……॥

Monday, 1 August 2011

गुरु वन्दना


   गुरुवर आपकी महिमा का हम
      करते हैं गुणगान सदा.......
   आँख मूँदकर श्री चरणों का
      करते हैं हम ध्यान सदा....
                   सूर्य किरणों से भी उज्जवल
                     आपकी महिमा का गान....
                   स्वर्ग से भी अधिक सुखकर
                     आपके चरणों का ध्यान....
                   आपके सान्निध्य का हम
                      करते हैं अरमान सदा....
गुरु कृपा से बढकर कोई
    और नहीं वरदान है’
प्रभु भजन से बढकर जग में
    गुरुजन का सम्मान है
आपकी हर भावना का
    करते हैं सम्मान सदा....
                   ओस की बूँदों सा निश्छल
                      आपका हर त्याग है....
                   आप- सा गुरुवर मिला तो
                       यह हमारा भाग्य है...
                   आपकी करुणा का हमको
                       रहता है अभिमान सदा...
गुरु शिष्य का नाता जग में
    भक्त और भगवान का
 आपका हो साथ तो फिर
   डर नहीं तूफान का.....
गुरु कृपा से ही होती है
  गोविन्द की पहचान सदा.......!!!